धरमियो

सोन चिड़कली रो सुगन ले'र

ब्हीर हुयो

गांव री सींव खनै

मिनकी मारग काट्यो

अचरज में पड़ग्यो

बापड़ो कीं सोच’र

जूती लेयनै हाथ मांय मूंधी मारी

मन में बोल्यो—अपसुगण नैं मिटा नाख्यो

म्हारो काम बण जावैलो।

अबै धरमियो

खाथो-खाथो चालण लाग्यो

सहर मांय बड़तांई कर्फ्यू...

फैरूं फ्यूज उड़ग्यो धरमियै रो।

बींनैं मन भरमावण लाग्यो

दिन-गिरै रो चक्कर उळझावण लाग्यो

सोन चिड़कली रो बिंब

काळो-पीळो दिखण लाग्यो।

सुगणां सूं कदै काम बण्यो

हिम्मत करी

अर

आगै चाल्यो

सागी ठौड़ पूग’र

आपरो काम सलटाय'नै

गुमान रै साथै पाछो

गांव खानी ब्हीर हुयो।

स्रोत
  • पोथी : जोत अर उजास ,
  • सिरजक : रतन ‘राहगीर’ ,
  • प्रकाशक : युवा सिंधी विकास समिति
जुड़्योड़ा विसै