हे अहल्या

सिला बणनै सूं

मुगती

थूं तद पासी,

जद थूं

थारै नारी पणै नै

जगासी

थारी वाणी नै

ऊँची उठा सी

छळी इन्द्रां रा

बिचौलिया चन्द्रां रा

असली चै’रा

प्रगटासी

भरमियोड़ै गौतमां री

आंख्यां खुलवासी।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : लक्ष्मीनारायण रंगा ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-27
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