सियाळै री टैम

पाणी री बारी ही

खेत में

झांझरकै-सी तोड़यो पाणी

बापू

बखावटै-सी

स्वेटर-टोपी पै'र

ओढ कामळ

चा लेयनै पूग्यो म्है

मोडै कस्सी

पाइचा टांग्यां

पाणी मांय फिरता

छपाछप

बापू बोल्या-

'थूं क्यूं फोड़ो देख्यो

पाळै में

अब तो घरै ईज

जावता।'

स्रोत
  • सिरजक : जगदीश गिरी ,
  • प्रकाशक : कवि रै हाथां चुणियोड़ी
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