सियाळै री टैम
पाणी री बारी ही
खेत में
झांझरकै-सी तोड़यो पाणी
बापू
बखावटै-सी
स्वेटर-टोपी पै'र
ओढ कामळ
चा लेयनै पूग्यो म्है
मोडै कस्सी
पाइचा टांग्यां
पाणी मांय फिरता
छपाछप
बापू बोल्या-
'थूं क्यूं फोड़ो देख्यो
पाळै में
अब तो घरै ईज
आ जावता।'