सलाम भाई

जावेद

थारी रामरमी मिली

सोचूं

सो की बदळग्यो

रोळे हाळी साल पाछै

पण

घणो सकून मिलै

जद पढूं

लाहौर सूं आयोड़

थारी रामरमी नै

तो लागै

जाणै

फिरंगियां रो किन्योड़ो बंटवारो

अमिट नी है

आपां भी बदळ सकाला

कदैई

वारै बंटवारै नै।

स्यात्

फेरूं कदैई

रावी,चिनाब झेलम

सिंधु,गंगा अर

जमना

गावैली

अेक सुर में।

बिस्मिल्ला खां री सहनाई रै

मीठे-मधरै सुरां में

झूम उठैला

अेकै साथै

सलमा, रेशमा

लता अर आसा

'सारे जहां से अच्छा

हिन्दोस्तां हमारा'

लिखणियां इकबाल जेडै

गीतकारां रै गीतां नै

उगेरैला कदै

ढाका सूं लेय’र

करांची ताई रा मिनख।

हां जावेद भाई हां

म्हानै इण रो

पूरो पतियारो है

सो साल पैलां

आपांरा दादो'सा

जद

नीं रैवण दिन्यो

कायम

फिरंगिया रै किन्योड़े

बंग-भंग नै

तो आपां

कद तांई सह सकांला

वारै किन्योडै

हिन्द-भंग नै

कद तांई ?

स्रोत
  • पोथी : उजास रा सुपना ,
  • सिरजक : शिवराज भारतीय ,
  • प्रकाशक : बोधि प्रकाशन
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