सत्ता पर बैठ्या लोग जद,

सेज पर सोय जावै

काळ पड़ जावै।

घर-गिरस्थी वाळा जद,

चौपड़ बिछावै

बाढ़ जावै।

जागरण रा जोगी जद,

भांड व्है जावै

जस मर जावै।

धरम तप री धूणी जद,

कैद व्है जावै

तेज बळ जावै।

लुगायां नै लोग जद,

दांव पर लगावै

धरती धंस जावै।

स्रोत
  • पोथी : अपरंच ,
  • सिरजक : पूजाश्री ,
  • संपादक : गौतम अरोड़ा
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