खुद री कदैई कोनी

हुवै बा

और मांय रत रैवणै

वाळी हूवै ‘औरत’

हरमेस आपरै ‘र’ री

जिंयां बीच-बिचाळै

रड़बड़ती रैवै।

स्रोत
  • पोथी : कवि रै हाथां चुणियोड़ी
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