मारग री रात

मारग री मां मारग नै इज जायौ

मारग रौ सपनौ सबसूं सवायौ

जिकौ

उण भूडा मिनख री गेडी पकड़्यां

खुद आपरै माथै कर काढै है नीं

मारग है

अर वौ जिको थड़्यां करता टाबर री

आंगळी अपड़

सागै सागै चालै है नीं

मारग है

मारग रै नीं व्है कदैई कोई दोगाचींती

वौ कदैई नीं व्है दियावळौ

जठी मूंडी करै उठी दिसा रेवै सदावंत त्यार

धा-छंट दोड़तौ

नीं ढबै कठैई सोरसांस

मारग री आरसी मारग

मारग रौ धरम मारग

मारग रौ मरम मारग

मारग री कसौटी मारग

कदै कदास पड़जा आंख में

तौ आंख खटकै

पण 'फिंगर प्रिंट करतां लागै जित्ती देर

उत्ती देर में पाछौ

अेक झटका सूं बारै आवै

अर आपसूं न्यारौ व्है जावै

व्हैतौ अेक सूं अलेखूं

अलेखूं सूं अेक

नेमधारी थितप्रग्य

सुख दुख दोनूं में रेवै अेक जेड़ौ

यूं हंसता लारै हंसतौ

रोवतां लारै रोवतौ लखावै

पण किणी सांचा में नीं मावै

हालतौ हालतौ मारगू

बदळ लेवौ भलाई आपरौ मत्तौ

आपरी मजल

आपरी सवारी

खोळ्यौ तगात

मारग नीं बदळै खुद रौ रूप

वौ तौ सदावंत

नित-रोज री गळाई

हौ जठै रौ जठै

उणीज भांत

नैठाव सूं पसर्‌यौ रैवै

काबा रौ व्हौ भलाई

कासी रौ

रांणी रौ व्हौ भलांई

दासी रौ

अै तौ अपां हां

जिका ओळखां उणनै न्यारौ-न्यारौ

नींतर वौ तौ

हांसी अर पीड़ नै

खेत अर बीड़ नै

निबळा'र खबीड़ नै

अेकला'र भीड़ नै

ईद अर हीड़ नै

जोड़तौ-जोड़तौ

कांईं राहड़ी री जात मेळतौ

नीं कठै गांठ नीं सांधौ

नीं गळैठा रौ गांदौ

अेकदम सळियौ-सोरौ

नीं दोरौ नीं फोरौ

नीं जीवै नीं मरै

नीं चिमकै नीं डरै

नीं छळ नीं छंद

नीं आद नीं अंत

नीं मद नीं माया

नीं ढळती वळती छाया

नीं हांसै नीं बोलै

नीं हालै नीं डोलै

नीं बांधे नीं खोलै

नीं सूवै नीं जागे

नीं लारै नीं आगै

आपे जलमै आपै बधै

मारग रौ तप मारग सूं सधै

जद तांईं रेवैला

चांद-तारा

इळा-आभौ

जमीं अर जीव

जठै-कठै अेक सूं बेसी व्हैला दोय

अेक नै बीजा सूं मिलावतौ

हरमेस व्हैला मारग

जात-जात री दुई रौ दुसमी

आपरा पसरता सरूप सागै

जीवैला इज जीवैला

जे जीवैला

तौ जीवैला अवस

भांय छेती

नेती नेती नेती

स्रोत
  • पोथी : मारग ,
  • सिरजक : चंद्रप्रकाश देवल ,
  • प्रकाशक : देवल प्रकासन, गोटीपा
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