करो आप सूं बडां रो थे सम्मान।
थांरो बधसी भाईड़ा घणो मान॥
आपरी बड़ाई सूं सदा रैवौ दूर।
दूजां रो हित भी करो थे भरपूर॥
चुगली-चांटी करण सूं इज्जत घटै।
इक-दूजै रै आपस में बैर भी बढ़ै॥
बातचीत करण में सदा रैवौ सतर्क।
नीं तो रिस्तां में पड़ जावै है फर्क॥
मीठा मीठा बोलणो अर सुख पावणो।
सगळी बातां नै गिण गांठ बांधणो॥