जन्म सूं ले’र मरण तांईं

मनख कै सोळा संस्कार

कम पड़र्‌यां छां

प्हैर अेक और संस्कार को

आविष्कार करणो पड़्यो

ब्याव तो नं कहै सकां

हां बगाड़ो जरूर कहै सकां छां

आपणा संस्कार को बगाड़ो

इंकै ताईं आगै बधबा सूं रोको

न्हं तौ समाज को नास हो जावैगो

जलमदन,ब्याव,अैनीवरसरी

ब्वार-थ्वांर सूं ले’र प्हली ईं

नरां खरचा छै आम आदमी कै

प्हैर य्हों और लादद्‌यो

अर प्हैर बी न्हं मानो

दखावो करणो छै

तो प्हैर बड़ो करो नं

करो नं अंबानी की नांई

हजार करोड़ की प्री-वेडिंग

प्हैर भल्यांई पाछै तो

आपणा टापरा क्यूं नं बिक जावै

आपणा टापरा क्यूं नं बिक जावै ‘हरप्रीत’।

स्रोत
  • पोथी : कवि रै हाथां चुणियोड़ी
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