(जिकी इण कारण हुई के थे थांरी ज्यामिति नीं जाणता हा)
टाबर चेतौ खोय रैयौ हो।
सवार रा दस बज रैया हा।
उणरौ हियौ भरीजगौ हो
टूटोड़ा पंख, कुमळीज्योड़ा फूलां सूं।
उणनै लखायौ के उणरै मूंडै में
अेक इज सबद बाकी रैयौ है
जद वौ दस्ताना उतार्या
कंवळी राख उणरै हाथां सूं खिरी।
बारी मांय सूं अेक मीनार निजर आवती ही।
वौ खुद नै बारी अर मीनार महसूस कियौ।
वौ देख्यौ के सांम्ही राख्योड़ी घड़ी
थिर निजर उणनै देख रैयी है।
रेसम रा धोळा ढिगला माथै
वौ आपरी चुपचाप सूतोड़ी छांवळी देखी।
करड़ौ ज्यामितिक टाबर
हथोड़ा सूं दरपण चूर-चूर कर न्हाख्यौ।
उणरै टूटतां इज छांवळी री अेक लांबी धारी
झूठै विश्रामघर माथै हमलौ करण लागी।