जद थाकूं हूं

आसा रौ थाम आसरौ

उभौ रैवूं हूं—

जिंयां कै सहारौ व्है है

ताळू कांधां रौ।

आसावां

चांद सरीखी

तिरती आवै

अर

फेरी देवण लागै म्हारी।

स्रोत
  • पोथी : रसूल अमजातोव अर विदेसी कवितावां ,
  • सिरजक : सुयुन बाई एरालीयेव ,
  • प्रकाशक : रॉयल पब्लिकेशन, जोधपुर ,
  • संस्करण : प्रथम संस्करण
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