दरद बांच बिरहण कामण को।
साजन कौल कर्यो सावण को।
कौल कर्यो पण मोल ना चुकियो
पंथ निहारत पलक ना झुकियो
नैणा को नासूर ना रुकियो
गालां पर आंसू मण-मण को।
साजन कौल कर्यो सावण को।
सूखो सरवर लेय हबोळा।
पाळ टूटगी टूट्या डोळा।
राता गाल हुया जद धोया।
सावण बगत बीत बावण को।
साजन कौल कर्यो आवण को।
छन में गियो निकळग्यो बन में।
दूध पूत की मन की मन में।
कन्त उळझग्यो कन कंचन में।
कन पग फेरो खोटी लावण को।
साजन कौळ कर्यो आवण को।
खुद को डील डरपणी लागै।
सूनी सेज सरपणी लागै।
सपणी भी गळ मपणी लागै
भगतण बिस पीगी जगतण को।
साजन कौल कर्यो आवण को।
कुण सो पाप लखी या लीला।
कोयल कूक चूभाइगी कीला।
पेट पांखळै कसणा ढीला।
ढोल्यो ढळ ढीली दावण की।
साजन कौल कर्यो सावण को।