अलेखूं फिल्मां रा निरत-निरदेसक अर नरतक प्रवीण कुमार मूल रूप सूं राजस्थान रै कांकरोली रा रैवासी। भट्यै-भट्यै, गठीलै अर स्वस्थ सरीर रा मालिक प्रवीण कुमार केई फिलमां में सह-अभिनेता रै रूप में काम कर्यों। हाल ई आप कसनै मैणत करै। आप में अहम अर बणावटीपणो तो बिलकुल ई नीं। साचै मायनै में आप अेक सै'ज कलाकार है।
कीं बगत पैली जद वै ‘तक्नीसियन स्टूडियो’ कलकतै में अभियांत्रिक प्रोडक्सन री ‘मानसी’ (उड़िया) सारू निरत फिलमा रैया हा, तौ ‘माणक’ सारू खास रूप सूं औ इंटरव्यू लियौ विस्णू पंचारिया।
विस्णू पंचारिया : आप आपरै बारै में कीं बतावौला? मतलब आपरी रुची निरत कांनी कीकर होई, किण-किण सूं निरत-कला री सिक्सा लीवी अर कांईं-कांईं इण सारू कर्यौ?
प्रवीण कुमार : आ तौ आप जांणौ ई हौ के म्हैं मूळ रूप सूं राजस्थान रौ हूं। बाळपणै सूं ईं म्हनै निरत सूं लगाव होयग्यौ हौ। होळै-होळै म्हारौ खिंचाव निरत कांनी बढण लागौ। इण सिलसिलै में म्हैं देवीलालजी सामर सूं मिल्यौ। वै म्हनै आपरै ग्रुप में सांमल कर लियौ। वठै म्हैं लोक-निरतां रौ ग्यांन हासल कर्यौ। पछै कीं अरसै रै बाद म्हैं दिल्ली गयौ परौ। वठै म्हारी मुलाकात निरताचार्य भगवांनदासजी सूं होई। वां सूं म्हैं हर भांत रा निरत सीख्या। वै ई म्हारा गरू है। इणरै पछै म्हैं ‘लिटिल बैलै ट्रुप’ में सांमल होयग्यौ। उणरै साथै केई कार्यक्रम ई पेस कर्या। अठी-वठी भटकतां-भटकतां अर मुस्कलां सूं जूझतां बंबोई पूग्यौ। उठै म्हारी मेळ-मुलाकात चावी फिलम अभिनेत्री अर निरतांगना आसा पारिख सूं होई। वां रै साथै दो निरत-नाटिकावां ‘अनारकली’ अर ‘चोला देवी’ में कांम कर्यौ।
विस्णू पंचारिया : आपनै निरत री प्रेरणा कठै सूं मिली?
प्रवीण कुमार : अंतरातमा सूं ईं म्हनै निरत री प्रेरणा मिली।
विस्णू पंचारिया : फिलमां में आपनै निरत-निरदेसण रौ कांम पैलपोत कुण सूंप्यौ?
प्रवीण कुमार : सन् 1969 री बात है। अेक दोस्त बोल्यौ के जावौ, व्ही सांतारांमजी निरतां माथै आधारित अेक फिलम बणाय रैया है, वठै थांनै चांस मिल सकै। म्हैं सांतारांम जी सूं मिलयौ। वै म्हारी परीक्सा लीवी अर म्हैं पास होयौ। वै म्हनै आपरी उण फिलम में निरत-निरदेसण रै अलावा सह-अभिनेता रै रूप में कांम करण रौ ई कैयौ। फिलम रौ नांव हौ ‘जल बिन मछली, नृत्य बिन बिजली’ अर आ सन् 1971 में रिलीज होई ही।
विस्णू पंचारिया : इणरै बाद आप किसी-किसी फिलमां में निरत-निरदेसण दियौ?
प्रवीण कुमार : सन् 1971 पूरौ ‘स्ट्रगल’ सूं निकळियौ। बरस 1972 में पाछौ म्हारी किसमत रौ दरवाजौ खुलियौ अर म्हारी मुलाकात ‘राजश्री पिक्चर्स’ वाळां सूं होई। वै आपरी दो फिलमां ‘मेरे भइया’ अर ‘हनीमून’ में म्हनै निरत-निरदेसण दियौ अर दूजी ई केई में निरत-निरदेसण दियौ अर केई में नरतक री हैसियत सूं कांम ई करियौ। जिंयां ‘रास्ते का पत्थर’, ‘जुगनू’, ‘अग्निरेखा’, ‘क्षितिज’ ‘पिंजरा’ (व्ही. सांतारांम), ‘हनुमान-विजय’ (बोहरा ब्रदर्स) ‘प्यासी नदी’, ‘दूर नहीं मंजिल’, ‘इंस्पेक्टर ईगल’, ‘जोशीला’, ‘दास्तान’ अर अम्रत नाहटा री घणी चावी फिलम ‘किस्सा कुर्सी का’ इत्याद।
विस्णू पंचारिया : हिन्दी फिलमां रै अलावा दूजी भासावां में बणण वाळी फिलमां में ईं आप निरत-निरदेसण दियौ?
प्रवीण कुमार : हां, दूजी भासावां री ई केई फिलमां में निरत-निरदेसण दियौ। मराठी में सांतारांमजी री बणायोड़ी ‘फरारी’ अर ‘सुरमा वंदीले’ में, बंगला री सुपर हिट फिलम ‘बेहुला लखीन्दर’ अर ‘मान-अभिमान’ में, उड़िया में प्रसांत नंदा रै निरदेसण में बणी ‘शैशव श्रावण’, ‘अमर प्रेम’, ‘अनुताप’, ‘सूना संसार’, ‘बंधु महतो’ अर ‘मानसी’ इत्याद में।
विस्णू पंचारिया : कांई आप निरत रै साथै गीत रौ होवणौ जरूरी मांनौ?
प्रवीण कुमार : फिलमी निरतां सारू भावुकता पूरण मीठा अर मोवणा गीत उणरी सुंदरता हदभांत बढाय देवै। आ समझौ के सोनै में सुगन्ध आय जावै। बिना गीत रौ निरत इत्ती ज्यादा ‘पौपूलरिटी’ नीं कर सकै, जित्ती के गीत माथै फिलमायौ गयौ निरत कर सकै। निरत अेक स्वस्थ अर सुंदर डील है अर गीत उण माथै जगमगावण वाळौ लुभावणौ आभूसण।
विस्णू पंचारिया : कांईं सास्त्रीय निरतां में सैक्सी मुद्रावां ई होवै?
प्रवीण कुमार : ‘डेफिनेट’। (अर आ कैवता थकां वै आपरी दोनूं टांगां नै फंसाय’र अेक हाथ सीनै माथै ले जाय’र अर दूजै सूं अेक मुद्रा बणाय’र उणीं बगत अेक निरत रौ ‘ओरिजनल पोज’ बणा नै दिखाय दियौ।)
विस्णू पंचारिया : कांईं हाल ई आप स्टेज माथै कार्यक्रम देवण में उत्सुक हौ?
प्रवीण कुमार : बिलकुल। स्टेज ई सै कीं है। स्टेज सूं ई फिलमां में आयौ हूं। फिलमां में निरत-निरदेसण देवण रै अलावा म्हैं केई निरत-नाटिकावां ई पेस कर चुक्यौ हूं। कीं अरसै पैली ‘रामायण’ निरत-नाटिका बंबोई में पेस करी। स्टेज माथै तौ म्हैं जीवण भर कार्यक्रम पेस करतौ ई रैवूंला।
विस्णू पंचारिया : सरीर री सुंदरता अर नीरोगता बणाई राखण सारू कांईं आप व्यायांम या ‘डाइट’ इत्याद...?
प्रवीण कुमार : निरत तौ अपणै आप में अेक व्यायांम है, पछै किणीं दूजा व्यायामां री जरूरत ई कांईं? सरीर नै नीरोग अर सुंदर राखण सारू जे कदैई व्यायांम री जरूत लखावै ई, तौ वा म्हैं निरत री ‘रिहर्सल’ कर’र’ पूरी कर लेवूं।
विस्णू पंचारिया : खाली बगत में आप कांईं करौ?
प्रवीण कुमार : यूं तौ आजकाल खाली बगत मिलै ई नीं। कलकत्तै अर बंबोई में घणौ व्यस्त रैवूं। फेरूं ई अैड़ौ बगत मिल ई जावै, तौ म्हैं निरत री भाव-भंगिमावां, पाद-प्रहारां अर मुद्रावां रै विसै में ई काट लेवूं।