राजस्थांन रा राजनेता राजस्थांनी भासा सारू गहराई कदैई विचार नीं करियौ

 

प्रहलाद जोसी : राजस्थान अेक पिछड़ियोड़ौ प्रांत गिणीजै, इणरै सरवांगीण विकास सारू आपनै किसा-किसा कांम महताऊ लागै?

 

भैरौसिंघजी सेखावत : आ बात सही है के राजस्थान अेक पिछड़्योड़ौ प्रांत है। ईकै विकास सारू च्यार बातां जरूरी है— पैली बिजळी, दूजी पांणी, तीजी साफ-सुथरौ प्रसासन अर चौथी केन्द्र सरकार कांनी सूं राजस्थांन कै हितां कौ संवरधन। जे अै च्यार बातां राजस्थांन सारू उपलब्ध होय जावै तौ राजस्थांन बैकवर्ड होवतां थकां ईं आगै रैय सकै।

 

प्रहलाद जोसी :  उदाहरण सरूप आपनै अबार अैड़ा किसा खास कांम घणा महताऊ लागै?

 

भैरौसिंघजी सेखावत : पैली बात तौ पलाना लिगनाइट पर ताप-बिजळीघर बेगौ सूं बेगौ बणै, दूजी बात राजस्थान नहर कौ निरमांण जुद्ध स्तर माथै होवै, तीजी बात राजस्थान-प्रसासन मे सगळै अधिकारियां कै बिचाळै इतरौ ‘मोटिवेसन क्रिएट’ कर दियौ जावै के राजस्थान का विकास में वै खुद कौ पूरौ वखत लगाय'नै बुद्धि कौ सदुपयोग कर सकै। बाकी केन्द्र कांनी सूं राजस्थांन की जिकी बराबर उपेक्षा होई है, उणनै निजर में राखतां थकां राजस्थांन कै हक में कांईं-कांईं चीजां होय सकै, ईं कौ ध्यांन राखणौ है।

 

प्रहलाद जोसी : राजस्थान में हमेसां दुकाळ री छाया रैवै। इणरौ स्थायी इलाज आप कांईं सोचौ?

 

भैरौसिंघजी सेखावत : राजस्थान में दुकाळ कै निदांन सारू दो खास बातां है— अेक तौ पीबा कौ पांणी अर दूजौ पसुवां कै चारौ। जे ईं दो बातां कौ प्रबंध होय जावै, तौ राजस्थान में जिकी दुकाळ की स्थिति है, वा इतरी भयंकर नीं रैवै। आं दोनूं वास्तै स्थायी काम होवै, ईं बात की जरूरत है। राजस्थान में करीब 23 हजार गांव अैड़ा है, जठै के पीबा कै पाणी की समस्या है। उठै प्राथमिकता सूं पांणी की व्यवस्था की जावै। इणी भांत चारै कै अभाव वाळै छेतरां में ईं चारा कौ प्रबंध कियौ जावै। जीं भांत जैसळमेर कै छेतर में केई ठौड़ चारौ तौ है, पण पीबा कौ पाणी कोनीं। उठै पाणी कौ प्रबंध जरूरी है, जिकौ के राजस्थान नहर सूं लायौ जा सकै।

 

प्रहलाद जोसी : आपरै सासन-काळ मे आप आं बातां री तरफ कांईं ध्यांन दियौ अर कितरी सफळता मिली?

 

भैरौसिंघजी सेखावत : राजस्थान नहर का निरमांण में जितरौ कांम जनता पारटी कै राज में होयौ अर जितरा रिपिया खरच होया, उतरौ कांम अर पइसा लारलै केई बरसां में खरच कोनी होया। म्हैं ईं सारू 17 करोड़ रिपियां की ठौड़ 32 करोड़ रिपियां कौ प्रावधांन कर’र खरच करिया, जिकौ के अबार पाछौ 22 करोड़ रिपिया होयग्यौ है। म्हे पीबा कौ पांणी गावां में उपलब्ध करावा सारू ‘ट्रेडिसनल स्कीम्स’ सरू कीवी, जीं में पाईप लाईनां को ठौड़ पाणी का ‘सोर्स’ क्रिएट करबा पर जोर दियौ गयौ पण वीं नै कांग्रेस सरकार ‘हैंडपंप’ में बदळ नांखी। वै 75 प्रतिसत हैडपंप आज खराब पड़्या है। वां की मरमत कौ कोई प्रबंध नीं है। केई ठौड़ नगर पालिका अर पंचायतां कै चुणावां में वोट लेवा सारू ई अै हैंडपंप मन-मरजी सूं लगाईज्या।

 

जनता सरकार की वखत म्हैं दिल्ली की मदद सूं दो सौ करोड़ रिपियां कौ अनाज लाय'नै विकास पेटै गावां में खरच कियौ। इणीं भांत दूजै प्रांतां सूं मिलवा आळी बिजळी को ई पूरौ उपयोग कियौ, जीं नै के आज सिवचरणजी ई स्वीकारै। प्रदेस में दो खाद कारखांना गैस आधारित लगावा वास्तै ई केन्द्र सूं मंजूरी होयगी ही, पण अबै वा खटाई में पड़गी है। लीलैंड कारखांनै की पैल म्हे लोग ई कीवी, ईं भांत केन्द्र सूं बत्ती सूं बत्ती मदद लेयनै अर प्राइवेट सेक्टर नै प्रोत्साहन देय’र राजस्थान नै लाभ पुगाबा की पूरी-पूरी कोसिस म्हे कीवी। भारत सरकार पर दबाव डाल'नै सालीणी योजना ई नीं, पंचबरसी योजना ई बडी बणवाई। पांच बरसां में जितरौ खरचौ विकास सारू होवतौ, उत्तौ तौ म्है म्हांकै दो बरसां कै सासनकाळ में कर लियौ। मतळब औ ई के केन्द्र पर ज्यादा सूं ज्यादा दबाव राख’र राज्य कै विकास का साधन जुटाया गया। प्रसासन सारू म्हैं इत्तौ ई कैय सकूं उण वखत कलेक्टर सूं लेय’र छोटौ सूं छोटौ अधिकारी प्रदेस कै विकास सारू कतसंकळप लाधतौ।

 

प्रहलाद जोसी : भिस्टवाड़ौ मिटावण नै अर प्रदेस में चोखै सासन सारू विरोधी दळ कांईं कर सकै?

 

भैरौसिंघजी सेखावत : विरोधी दळ भ्रस्टाचार नै मिटाबा में आ कर सकै के बीं नै चवड़ै लावै अर सरकार माथै दबाव नांखै के वा भ्रस्ट तत्वां नै सजा देवै। ईं कै अलावा तौ विरोधी दळ ईं मांमलै में कांईं कर सकै?

 

प्रहलाद जोसी : अबै कीं खास बातां सिक्षा अर राजस्थांनी भासा बाबत पूछस्यूं। प्रदेस में सिक्षा री मौजूदा स्थिति माथै आंप कांईं कहस्यौ?

 

भैरौसिंघजी सेखावत : सिक्षा संबंधी मांमलै की बात तौ सिक्षासास्त्रियां पर छोड देवणी चाहिजै। ईं मामलै में म्हांकौ कीं कैवणौ अबार बाजब नीं रहसी।

 

प्रहलाद जोसी : राजस्थांनी भासा रै बाबत आपरा कांईं विचार है? प्राथमिक सिक्षा में इणरी अनिवार्यता बाबत आप कांईं कहस्यौ?

 

भैरौसिंघजी सेखावत : राजस्थांनी आपां की मायड़ भासा है, या बात ई सही है के मायड़ भासा कै माध्यम सूं कोई बात कही जावै तौ खास कर गावां में लोग आछी तरियां समझ सकै। ईं में केई प्रकार का विवाद होय सकै। म्हैं आ मैसूस करूं के वां विवादां नै सारवजनिक नीं बणाया जावै तौ आछौ है। म्हैं आ कैय सकूं के राजस्थांनी अेक संपन्न भासा है। ईं में उत्तम कोटि का ग्रंथ है। आ अेक वीरोचित भासा है। ईं भासा नै आप सब तरै सूं देखौ, पूरौ विस्लेसण करौ तो लागसी के आ कित्ती सबळी भासा है। म्हैं ईं बाबत म्हारौ विचार पूरी तरियां ‘अेक्सप्रेस’ नीं कर सकूं। पण राजस्थांनी भासा अर ईं कै न्यारै-न्यारै हलकां की बोलियां सुणां तौ अैड़ौ लागै जाणै वीं में जनता कौ मन बोल रह्यौ है, सो आ अेक संपूरण अर सिमरिद्ध भासा है, ईं में कोई कमी नीं है। कमी है तौ फगत प्रचार-प्रसार की है।

 

प्रहलाद जोसी : पण भणिया-गुणिया लोग इणनै हीण द्रिस्टी सूं क्यूं देखै?

 

भैरौसिंघजी सेखावत : आ बात कीं वरगां अर कीं छेत्रां की होय सकै। राजस्थांन कौ वासिंदौ कमाई खातर बारै प्रदेसां में जावै, वौ भलां ईं कित्तौ ई पइसौ कमायलै, खुद कै घर में मारवाड़ी ई बोलै। आपां कौ औ प्रयत्न रैवणौ चाहिजै के लोग राजस्थानी भासा नै भूल नीं जावै। ईं वीरोचित भासा नै बोलबा-चालबा में आपां नै गरव ई होवणौ चाहिजै।

 

प्रहलाद जोसी :  अर सिक्षा में अनिवार्यता बाबत?

 

भैरौसिंघजी सेखावत : राजस्थांनी भासा नै सिक्षा कै छेत्र में अनिवार्य विसै बणाबा बाबत म्हैं कीं खुलासै राय नीं देय सकूं।

 

प्रहलाद जोसी : कांईं कारण है के राजस्थान रा राजनेता इण तरफ ध्यांन नीं देवै?

 

भैरौसिंघजी सेखावत : म्हैं समझूं अर स्वीकार ई करूं के ईं विसै पर सरकार चायै कांग्रेस की रैयी होवै या म्हांकी, जितरौ गहराई सूं विचार करणौ चाहिजतौ वौ सरकारी स्तर पर कोनीं होयौ।

 

प्रहलाद जोसी : राजस्थांनी भासा री संवैधानिक मांनता बाबत आप कांई कहस्यौ?

 

भैरौसिंघजी सेखावत : राजस्थांनी भासा नै संवैधानिक मांनता मिलै, म्हैं ईं कौ पक्षधर हूं। मानता नीं मिलबा कौ कारण राजनैतिक रोड़ैबाजी है। जे केन्द्र में राजस्थांन कौ राजनैतिक प्रभाव होवै तौ काम आसांनी सूं बण सकै।

 

प्रहलाद जोसी : पण आपां री विधांनसभा में ईं तौ इण बाबत कोसिस होवणी चाहिजै?

 

भैरौसिंघजी सेखावत : राजस्थानी भासा सारू प्रदेस री विधानसभा कांईं कांम कर सकै, औ सवाल घणौ महताऊ है। विधानसभा का जिका सदस्य आसांनी सूं राजस्थांनी में खुद की बात कैय सकै, जे वै विधांनसभा में राजस्थानी में बोलणौ तै कर लै तौ घणौ सांतरौ कांम बणै। रिपोर्टर अर प्रेस आळा सगळा ई राजस्थांनी का महत्व नै समझवा लागै। ईं भांत जे लिखणौ अर बांचणौ राजस्थांनी में सरू होय जावै तौ वीं कौ घणौ असर पड़ै।

 

प्रहलाद जोसी : पण संवैधानिक मांनता सारू विधानसभा प्रस्ताव तौ पास कर ई सकै है?

 

भैरौसिंघजी सेखावत : दुरभाग की बात आ है के राजस्थांनी भासा कै मसलै नै जितरी गंभीरता सूं लेवणौ चाहिजै, आज दिन तांईं नीं लिरीज्यौ। कीं समझ में ईं कोनीं आवै के क्यूं नीं लिरीज्यौ। पण जे विधांनसभा में राजस्थानी कौ माहौल बणै, जन-मानस को दबाव होवै तौ निस्चै ई अेक बौत बडौ परिवरतन ईं दिसा में होय सकै।

 

प्रहलाद जोसी : आपरै सासन री वखत आप ईं भासा सारू कांईं करियौ?

 

भैरौसिंघजी सेखावत : जनता सासन की वखत राजस्थानी की बात म्हांकै ध्यांन में ही। निजी रूप सूं म्हैं तौ सदीव राजस्थांनी में ईं बोलूं। अठै तांईं के अफसरां सूं बात-बतळाव की वेळा ई म्हैं राजस्थानी में बातचीत करतौ। ईं सूं अपणापण लखावतौ। पण म्हैं पैला ई बतायौ अर स्वीकार करियौ ई के राजस्थांनी रै उत्थांन सारू म्हैं बेसी कीं नीं कर सकियौ। पण ईं कै प्रचार-प्रसार सारू जो लोग म्हां सूं मिलिया, म्हैं वां की बातां ध्यांन सूं सुणी वाजब मदद का प्रयत्न ई किया। सबदकोस वाळै मांमलै में तौ खूब सहायता कीवी। आछा ग्रंथ लिखवा सारू विदवानां नै प्रोत्साहन अर प्रेरणा ई दीणी।

 

प्रहलाद जोसी : अर अबै आखिर में ‘माणक’ सारू अर ‘माणक’ री मारफत इण रै पाठकां सारू आपरौ संदेस चास्यूं!

 

भैरौसिंघजी सेखावत : राजस्थांनी भासा, साहित कला, संस्कृति, रीति-रिवाज अर परम्परा इत्याद विसयां पर ‘माणक’ की सेवा सराहनीय है। इण अैतिहासिक कांम सारू म्हैं सगळा राजस्थांनी भायां नै आ निवेदन करणौ चावूं के ईं विसै कै सम्बन्ध में जिण कनै जिण तरै की ई जांणकारी होवै ‘माणक’ में प्रकासन करवाय ईं सेवा में भागीदार बणै। राजस्थानी संस्कृती की सांस्कृतिक ओळखांण बणायी राखण सारू राजस्थानी भासा कै संवरधन अर ईं कै प्रचार-प्रसार में हर संभव योगदान करै।

स्रोत
  • पोथी : माणक (पारिवारिक राजस्थानी मासिक) ,
  • सिरजक : भैरौसिंघजी सेखावत सूं प्रहलादजी जोसी री बंतळ ,
  • संपादक : पदम मेहता ,
  • प्रकाशक : माणक प्रकाशन
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