मीना सूं उळझाव म्हारी जिंदगांणी रौ सब सूं घटिया बगत हौ
कमाल अमरोही रौ नांव आज फिलमां में किणी सूं छांनौ कोनी। वै आज तांईं 9 फिलमां बणाई, अर अेक सूं अेक आला। ‘महल’, ‘पाकीज़ा’ अर ‘दायरा’ जैड़ी हिन्दी री टाळवी अर नांमी फिलमां रा निरदेसक कमाल भाई जद पाछला दिनां ‘रजिया सुल्तांन’ री सूटिंग सारू आया, तौ सूटिंग रै बिचाळै लंच रै बगत आपरौ भोजन जीमणौ भूल’र ‘माणक’ सारू ब्रजमोहन जी व्यास रै साथै नयी-जूनी बातां में रमगा। आपई इण बात-विगत नै बांच’र कमाल अमरोही सूं मूंडा-मूंड होवौ।
ब्रजमोहन व्यास : अबार थे रजिया सुलतांन रा कैड़ा परसंगां री सूटिंग सारू जैसळमेर आया?
कमाल अमरोही : अठै जिण सिचवेसन नै फिलमावण सारू म्हे अबार आया, उण में मुळतांन अर भागळपुर सूं होवतौ थकौ रजिया रौ काफिलौ दिल्ली धकी बधै अर साथै रौ साथै ‘अे दिल नादांन’ नांव रौ गीत चालै। असल में आ जगा पाकिस्तांन में आयोड़ी है, पण म्हे उठै सूटिंग करता, तौ बरस लाग जाता। म्हैं पाकिस्तांन में जाय’र उण मूळ जागा नै ई देखी, म्हनै वैड़ी री वैड़ी सिचवेसन अठै जैसळमेर रै सम रा धोरां में मिळगी।
ब्रजमोहन व्यास : राजस्थांनी भासा री फिलमां रै बाबत आप कांईं सोचौ?
कमाल अमरोही : राजस्थांनी भासा री फिलमां रै बाबत राजस्थांन री सरकार नै सोचणौ चाहिजै। दूजा प्रांतां नै देखौ, गुजरात नै लौ। वठै री सरकार खुद री भासा रै फिलम उद्योग नै पनपावै। आपरै जोधपुर रा ई श्रीराम बोहरा गुजराती में फिलमां बणावै। वांनै चाहिजै के राजस्थांनी भासा री फिलमां वास्तै ई आगै आवै। म्हैं तौ जद जदैई राजस्थांनी भासा अर उणरा गीत सुणूं, तौ वांरौ मिठास म्हनै खूब ई आछौ लागै।
ब्रजमोहन व्यास : ‘रजिया सुलतांन’ रै पछै कोई दूजी फिलम सरू करवा रौ ई विचार करियौ होसी?
कमाल अमरोही : ‘रजिया सुलतांन’ रै पछै म्हैं राजेस खन्ना नै लेय’र ‘मजनू’ फिलम बणास्यूं। उण रै पछै समूदे राजस्थांन नै किणीं अेक ई फिलम में पूरी तरियां फिलमावण री सोचूं।
ब्रजमोहन व्यास : जैसळमेर में सूटिंग करती बगत किणी भात री दिक्कत-दोराई तौ कोनी आई?
कमाल अमरोही : दिक्कत दोराई री बात क्यूं पूछौ, उत्तर प्रदेस अर राजस्थांन—दोनूं ईं प्रांतां में फिलम-यूनिट नै लोगां रौ सहयोग कोनी मिळै। अठा री पुलिस खुद रै पुलिस-कोस सारू म्हां सूं चंदौ मांगै। नीं देवां तौ वै बैरियां सूं ई भूंडा। इण वार कीं फौजी अैम.ई.अैस.रा जवानां म्हांरी यूनिट रा लोगां साथै मार-पीट कीवी। जिण जगा म्हे सूटिंग करणौ चावता, वा ई म्हांनै नौकरसाही री वजै सूं कोनी मिळी, पण खैर आं सगळी बातां नै छोडौ, कठै ई म्हांरौ जैसळमेर आवणौ ई बंद नीं करवाय दै भला मिनख।
ब्रजमोहन व्यास : भारत में जिकी वीडियौ फिलमां बणै, वांरौ फिलम उद्योग माथै कांईं असर पड़सी?
कमाल अमरोही : सरकार नै बैगी वीडियौ फिलमां माथै पाबंदी लगाय देवणी चाहिजै, नींतर फिलम उद्योग चौपट व्है जासी। कोई भलौ मिनख फिलम बणावण नै त्यार कोनी होसी। आप खुद ई सोचौ ज्यूं म्हारी इण फिलम ‘रजिया सुल्तांन’ माथै 4 करोड़ रिपियां री लागत आसी, जे दरसक इण नै वीडियौ फिलम रै जरियै घरै बैठ’र सगळै परिवार रै साथै 15 रिपियां में देख लेसी, तौ म्हांरा कांईं हाल होसी, म्हे कठै जास्यां अर कांईं खास्यां?
ब्रजमोहन व्यास : आपरी जिंदगाणी रौ सब सूं बढ़िया अर सब सूं घटिया बगत कुणसौ रह्यौ?
कमाल अमरोही : जद म्हारी फिलम ‘महल’ हिट होई, तौ म्हनै खूब खुसी व्ही। परणीजियां ई जितरौ राजी नीं व्हियौ, उतरौ उण बगत राजी हौ। पण पछै बगत पलटौ खायौ अर ‘पाकीजा’ फिलम बणावती बगत म्हारौ मीनाकुमारी सूं उळझाव बधगौ। वा आपरी जिद माथै अड़ियोड़ी रह्यी अर म्हैं केई बरसां तांईं न्यारा-न्यारा व्हैगा। मीनाकुमारी म्हनै तंग करवा में घाटौ कोनी राख्यौ। 6 बरसां तांईं ‘पाकीज़ा’ फिलम बंद रह्यी। ओ म्हारी जिंदगाणी रौ सब सूं घटिया बगत हौ। इण नै सुनीलदत्त री महरबानी कहस्यूं के वौ म्हां धणी-लुगाई में कांम चलाऊ राजीपौ करवाय दियौ अर ‘पाकीज़ा’ फिलम बणी।
ब्रजमोहन व्यास : मीनाकुमारी री याद नै अमर बणावण सारू कांईं किणी फिलम रो विचार कदै थांरै जीव में आवै?
कमाल अमरोही : मीना री याद सारू ‘पाकीज़ा’ ई घणी, जिण सूं के वा अमर रैसी, बाकी तौ फालतू री बातां।