साधना मुजब दुकाळ सूं जूंझ रैया हां
दुकाळ राजस्थान सारू अेक स्थाई अबखाई बणगौ है। पण अबकाळै तो इण सईकै रौ सै सूं भीषण काळ हौ। राज्य सरकार आपरा सीमित साधनां रै बावजूद काळ सूं किण भांत जूंझ रैयी है अर प्रदेस रै विकास सारू ई कांई प्रयास करीज रैया है, आं सगळां सवालां रै ओळूं-दोळूं जूंझ रैयी है अर प्रदेस रै विकास सारू ई कांई प्रयास करीज रया है, आं सगळां सवालां रै ओळूं-दोळूं मुख्यमंत्री हरिदेवजी जोशू सूं आमी-सामी करी है ‘माणक’ रा खास नुमाइंदा राजेन्द्र व्यास। अनुभवी राजनेता, कुशल प्रशासक मितभाषी जोशीजी सूं हिन्दी में हुई बात बंतळ रौ राजस्थानी उल्थौ पाठकां रै निजरां सामी—
राजेन्द्र व्यास : अकाळ राजस्थान सारू अेक स्थाई समस्या बणगौ है। इण बरस रै दुकाळ बाबत आप कांई बतावणी चावौला?
राजेन्द्र व्यास : आ बात साव सांची है कै अकाळ राजस्थान सारू अेक स्थाई समस्या बणियोड़ौ है। आयै साल अठै किणी न किणी हिस्सै में अकाळ पड़तौ ई रैवै। पण अबकाळै रौ दुकाळ तो सईकै रौ भीषणतम काल है। इण संकट री भीषणता इण बात सूं सफा लाग सकै कै राजस्थान रा कुळ 38692 गांवां मांय सूं अबकाळै 31926 गांव इणसूं प्रभावित हुया है। जदके लारलै बरस (85-86) मांय 26859 अर उणसूं पैलड़ै बरस 1984-85 मांय 10276 गांव ई अकाळ पीड़ित हा।
अबकाळै रै दुकाळ री दूजी भीषणता आ ही कै 21261 गांवां में फसल तीन चौथाई सूं बेसी अर 10655 गांवां में आधी सूं पूण रै बिचाळै खतम हुयगी। जिणसूं आं गांवां रै लगैटगै 2.53 करोड़ मानखै माथै इणरौ प्रभाव पड़ियौ है।
दूजा प्रदेसां में दुकाळ री स्थिति अर आपां रै अठै पड़ियै काळ में अेक बात औरूं दुखदाई आ है कै आपणौ प्रदेस रौ दो-तिहाई भाग मरुक्षेत्र अर अर्द्ध मरुक्षेत्र है। जठै री स्थिति नै सोचतां पाण आपां रै सामी मीलां ताई तपती रेत, ऊपर सूं तावड़ै री मार अर पीवण सारू पाणी तकात नीं। इस्यी दोराई घड़ी में बठै रे मानखै री स्थिति कित्ती संकटमय होवै है, इणरौ अंदाज ई खुद आपरै सवाल रो जवाब है।
राजेन्द्र व्यास : अकाळ सूं आपरी सरकार किंयां जूंझ रैयी है? पीड़ितां नै किण भांत सहायता दिरीज रैयी है?
हरिदेव जोशी : अबकाळै रौ दुकाळ कोई दो-च्यार जिलां में नीं होय’र सगळा ई सत्ताईस जिलां में आपरा पग पसार्योड़ौ है। सरकार आपरी पूरी कोशिश सूं अर जित्ता ई साधन उपलब्ध है, उणां रै बलबूतै उणसूं जूंझ रैयी है। म्हां बेसी सूं बेसी अकाळ राहत काम खोल’र लोगां नै रोजगार, पीवण रौ पाणी अर पशुधन सारू चारा री व्यवस्था करी हां। दु:ख रा घणकरा दिन कटग्या है। भगवान सब ठीक करैला अर उम्मीद है अबकाळै बगत चोखी बिरखा होसी अर संकट सूं पार पड़ जास्यां।
राजेन्द्र व्यास : अकाळ पीड़ियां नै सरकार किण भांत कांई मदद कर रैयी है इणरो कीं बेसी खुलासौ?
हरिदेव जोशी : सीमित साधनां रै बावजूद जनवरी 87 सूं राहत कामां माथै मजूर लगाईज्या है, जिणरी संख्या 2,23,715 (जनवरी), 5,28,765 (फरवरी) 9,03,062 (मार्च), 11,69,197 (अप्रैल) है। मई अर जून रा म्हीना में आ संख्या बढ’र 14 लाख अर 17 लाख तांई पूग जासी। पेयजल समस्या रै निदान सारू सघन प्रयास करीज्या है। हर पंचायत समिति में राहत काम स्थाई उपयोगिता अर स्थानीय जरूरत नै सामी राख’र मंजूर करीज्या है।
अप्रैल 87 तांई अेक लाख सूं बेसी कामां नै मंजूरी दिरीजी है। आधै सूं बेसी माथै तो काम ई सरू हुयग्यौ है। गांवां में अेक लाख सूं बेसी कुवां रै निर्माण या वांनै ऊंडा करण रौ अभूतपूर्व कार्यक्रम ई हाथ में लिरीज्यौ है।
अकाळ सूं जूंझण खातर केन्द्र सूं ई पूरी इमदाद मिलण री उम्मीद है। केन्द्र सूं प्राप्त तीन लाख टन गेहूं रौ वितरण अर अबार तांई लगैटगै सौ करोड़ रु. मजदूरी रै रूप में श्रमिकां नै दिरीज्या है।
अन्न अर चारै री माकूल व्यवस्ता करीजी है। पशुधन नै बचावण खातर पशुपालकां नै हरौ चारौ उपलब्ध करावण सारू राज्य रा 24 जिलां में सौ फीसदी परिवहन अनुदान देवण री व्यवस्था करीजी है। पशु पालकां नै सस्ती कीमत में चारौ मिल जावण सूं बौत राहत पूगी है। असहाय पशुवां नै संरक्षण सारू स्वयंसेवी संस्थावां रै मारफत पशु शिविरां री स्वीकृति अर पर्याप्त अनुदान राशि दिरीजी है। राज्य रा 19 जिलां में 2.44 लाख पशुवां सारू पशु पोषण केन्द्र री मंजूरी दिरीजी है। राज्य डेयरी फैडरेशन रै मारफत पशु पालकां नै सवा रुपिया में 2 किलो पशु आहार प्रति पशु प्रतिदिन रै हिसाब सूं 1341 केन्द्रां रै माध्यम सूं 21 जिलां में उपलब्ध कराईज्यौ है। डेयरी फेडरेशन लगैटगै 50 हजार मेट्रिक टन पशु आहार लागत मात्र कीमत माथै वितरित कीधौ है।
इण भांत हर क्षेत्र में राहत सारू ईमानदारी सूं प्रयास करीज्या है। केन्द्रीय अध्ययन दल ई राजस्थान रा अकाळ पीड़ित क्षेत्र रौ दौरौ कर चुक्यौ है। केन्द्र सूं बेसी मदद मिल्यां राहत कामां में औरूं तेजी लाय सकांला।
राजेन्द्र व्यास : आपरी सरकार राहत काम राजनीति सूं प्रेरित हुय’र खोल रैयी है? खास कर’र आथूणै राजस्थान साथै भेदभाव बरतीजै। इण बाबत आपरौ कांई कैवणौ है?
हरिदेव जोशी : अे आरोप सफा खोटा। अकाळ राहत रा काम राजनीति सूं प्रेरित हुय’र कोनी खोलीजै। जित्ता साधन सरकार जुटाय सकै उणीज हिसाब सूं अर केन्द्र सरकार जित्ती मदद दैवै, उण रै अनुसार ही अे काम खोलीजै है।
राजेन्द्र व्यास : अकाळ री समस्या रै स्थायी समाधान बाबत?
हरिदेव जोशी : पईसा होवै तो स्थाई समाधान री बात सोचीज सकै। कम पईसा या कम साधनां सूं स्थाई समाधान होवै कोनी अर पूरौ पईसौ मिलै कोनी।
राजेन्द्र व्यास : गुजरात वगैरा नै केन्द्रीय साधन...?
हरिदेव जोशी : आ बात कोनी। दरअसल गुजरात इत्याद प्रदेसां कनै खुद रा वित्तीय साधन बौत है, भौगोलिक स्थिति ई इत्ती अबखाई वाळी कोनी जदकै आपां कंनै वित्तीय साधन बौत कम है, इण वास्तै बौत मोटा पैमाना माथै काम नीं कर सकां हां।
राजेन्द्र व्यास : स्वयंसेवी संस्थावां अर प्रवासियां सूं सैयोग?
हरिदेव जोशी : स्वयंसेवी संस्थावां कित्तौक कियौ है? वे सिरफ चारौ पुगायौ है। पण जिंकौ ई काम करियौ वां रौ काम बौत चोखौ है।
राजेन्द्र व्यास : अकाळ बाबत ओरूं कोई जाणकारी?
हरिदेव जोशी : आप अकाळ राहत मंत्री गुलाबसिंह जी शक्तावत सूं मिल लिरावौ। म्हैं फोन करवाय दूं हूं। उणां सूं आपनै ओरूं जाणकारी मिल जासी।
राजेन्द्र व्यास : अबै दो दूजा सवाल? राजस्थान रै चहुंमुखी विकास बाबत आप कांई कहस्यौ?
हरिदेव जोशी : राजस्थान प्रदेस पिछड़ियोड़ौ है, आ बात सांची। इण रौ तेजी सूं विकास करण सारू आर्थिक साधन बढावणा पड़सी। जनता अर सगळा राजनैतिक दळ मिल’र राज्य रा संसाधन बढावण में सरकार नै मदद करै तो निस्चै ई राज्य रा संसाधन बधसी। म्हां सातवीं पांचसाला योजना नै राज्य रै चहुंमुखी विकास रा ध्येय नै सामी राख’र बणाई है, जिणमें बिजली, सिंचाई अर पीवण रा पाणी नै खास प्राथमिकतावां दिरीजी है।
म्हारी आ द्रिढमानता है कै इण जुग में ऊर्जा ई विकास री सांचैली कुंजी है। इणीज वास्तै राज्य नै बिजली रा जित्ता ई स्त्रोत मिळ सकै, उण सगळां रै उपयोग सारू राज्य सरकार प्रयासरत है। सातवीं आठवीं योजना तांई राजस्थान सूं बिजळी रौ अभाव पूरी तरियां खतम हुय जावैला।
बिजली री पर्याप्त उपलब्धता सूं राज्य में बौत सारा उद्योग धंधा लाग सकैला। राजस्थान में खनिज आधारित उद्योगां अर इलेक्ट्रोनिक उद्योग री भारी संभावनावां है, इणीज बात नै दीठ में राख’र उद्योगां नै प्रोत्साहन सारू नुंवी नीति बणाईजी है। अबै प्रदेस में नुंवा उद्योग लगावण वाळा नै उत्पादिक माल माथै 31 मार्च 1992 तांई बिक्री कर में रियायत दिरीजसी।
इण नीति मुजब पिछड़ा जिलां में सात बरस तांई आ छूट मिलसी। विकसित जिलां में छूट री सीमा 5 बरस तांई रैसी। औद्योगिक दीठ सूं राज्य में सिरोही, जैसलमेर, चूरू, बाड़मेर, अलवर, भीलवाड़ा, जोधपुर, नागौर, उदैपुर, बांसवाड़ा, जालौर, झुंजुणू, नागौर, उदैपुर, बांसवाड़ा, जालौर, झुंझणू, सीकर, झालावाड़, अर टौंक जिला पिछड़ा जिला घोषित हुयोड़ा है।
इणी भांत राज्य रै विकास सारू सरकार हर क्षेत्र में काम कर रैयी है। राजस्थान रौ चहुंमुखी विकास अर हरियौ-भरियौ राजस्थान ई म्हारौ सुपनौ है।
राजेन्द्र व्यास : राजस्थानी भाषा अर राजस्थानी फिलमां नै प्रोत्साहन बाबत आप कांई कहस्यौ?
हरिदेव जोशी : राजस्थानी भाषा बाबत राजस्थानी अकादमी काम कर रैयी है। आम तौर माथै लोग मान्यता री मांग करै है, दूजी ई कोई भाषावां वाळा ज्यूं कोंकणी, नेपाली वगैरा री बात ई उठै। पण अबै कोई इण मूड में कोनी लागै कै नुंवी भाषावां आगै लागै।
राजस्थानी फिलमां नै प्रोत्साहन सारू नीति विचाराधीन है। फिल्म निगम बणावण सारूं कीं लोगां सू सुझाव मांगिया है। देखौ! कांई होवै?