सजळ-नैणां री निजर बा, याद नित आयां सरै!

याद आवै है, जणा गजल भी गायां सरै!

निजर ओलैसी'क सारै काम जद-जद जीभ रो!

चुप कियां रैवै, हियै रो हेत जतळायां सरै!

प्यार री भाषा, जुगां सूं आसुवां में भीजणी!

पीड़ रै दरियाव में तो यार! नित न्हायां सरै!

ना कुणी देखी-सुणी, पण बात गुपचुप होयगी!

फूल, जे फूलै कठैई, गंध मैकायां सरै!

प्यार, कुदरत रो करिस्मो, रीत, जिनगाणी-तणी!

भाव हिरदै में उठै, पण होठ पर आयां सरै!

छायगी मन-प्राण उपरां, रूप री च्यानणी!

‌अेकलै नै आवड़ै कद, याद परणायां सरै!

तू अठै कोनी, अठै मैं भी नहीं होतां-थकां!

फेर आपां हां कठै? बात अरथायां सरै!

स्रोत
  • पोथी : मरवण तार बजा ,
  • सिरजक : किशोर कल्पनाकांत ,
  • प्रकाशक : कल्पनालोक प्रकाशन (रतनगढ़)
जुड़्योड़ा विसै