वूं करतो रै घात म्हनै कांई की चन्ता।
तूं जद म्हारै साथ म्हनै कांई की चन्ता॥
वूं की फुफकारां जहरीली आग लगावै।
तूं कर दे बरसात म्हनै कांई की चन्ता॥
वूंनै कुतर्या गर जोड़ा पण थन्नै तो।
फेरा खाया सात म्हनै कांई की चन्ता॥
घर खुद को भर के भी वूं लूटै दुनिया।
थन्नै भरी परात म्हनै कांई की चन्ता॥
वूंनै भर-भर बटका चाखी खाल घणी।
थारी सजी बरात म्हनै कांई की चन्ता॥
स्वारथ सूं भरपूर जमानो बैरी बण ज्या।
मिसरी थारी बात म्हनै कांई की चन्ता॥
मन में घुप्प अंधेरो राजी रातां सूं
बण ज्या तूं परभात म्हनै कांई की चन्ता॥