ऊ जद बी झाँकै आकाँ सूँ
दारू रसज्या छै गालां सूं
आला लत्ता में झरझरता
टपकै छै मोती बाळां सूं
बरसै छै छम-छम चौमासा
ज्या बळबळता ऊंदाळां सूं
बात उल्हाणा में ई करै छै
ऊ म्हारा मन का स्याळा सूँ।
छेद ई न्हाँकी छाती म्हारी
झम-झम जोबन का भालाँ सूँ।
ज्या नै चणींक ‘यकीन’ ऊ खाडै
नत मंदरा-मंदरा झालाँ सूं।