जद बी झाँकै आकाँ सूँ

दारू रसज्या छै गालां सूं

आला लत्ता में झरझरता

टपकै छै मोती बाळां सूं

बरसै छै छम-छम चौमासा

ज्या बळबळता ऊंदाळां सूं

बात उल्हाणा में करै छै

म्हारा मन का स्याळा सूँ।

छेद न्हाँकी छाती म्हारी

झम-झम जोबन का भालाँ सूँ।

ज्या नै चणींक ‘यकीन’ खाडै

नत मंदरा-मंदरा झालाँ सूं।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : पुरुषोत्तम 'यकीन' ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशक पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 26
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