रंग रै सूरज रात हुवै है,

परभातां री बात हुवै है।

अरक उगै नीं आंथै आभै,

दिनुगै’र दिनांथ हुवै है।

तिरसा तीरां रूळै रेत में,

समद सीत सौगात हुवै है।

फूटी भीतां रंग रा मांडण,

रंग री आही जात हुवै है।

थां सिरजो चितराम मुलक रा,

इण बस्ती क्यूं गात हुवै है?

स्रोत
  • पोथी : हिवड़ै रो उजास ,
  • सिरजक : सवाई सिंह शेखावत ,
  • संपादक : श्रीलाल नथमल जोशी ,
  • प्रकाशक : शिक्षा विभाग राजस्थान के लिए उषा पब्लिशिंग हाउस, जोधपुर
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