तेज बीजळी म्हने दीखै थारी आंख्यां में।
काळी रात समटती दीखै थारी आंख्यां में॥
घायल होयो घुप्प अंधेरो यो देखो।
चलको घणो चमकतो दीखै थारी आंख्यां में॥
घणी निराशा नै घेर्यो यो मन जद-जद।
आशा पण मुसकाती दीखै थारी आंख्यां में॥
जद उम्मींदां सुस्ताई जीवन जीबा की।
हूंस जागती फेरुं दीखै थारी आंख्यां में॥
सूखी धरती भाप बण्यो जळ अब देखो।
बदळी मेह बरसाती दीखै थारी आंख्यां में॥
मन का थक्या पखेरूं बैठ्या घण तसाया।
समदर म्हनै उफणतो दीखै थारी आंख्यां में॥
पतझड़ सारी रंगत पीग्यो फेरुं भी।
गुलमोहर इतरातो दीखै थारी आंख्यां में॥