भटक्योड़ा नै मारग ल्याणो सोरो कोनी
अपणां स्यूं भी हेत निभाणो सोरो कोनी
सेवा लेणी सै चावै, पण सांची आ है
सेवा-सुख रो करज चुकाणो सोरो कोनी
देखणियां रै भी भाया दो-दो आंख्यां है
पहर सिंघ री खाल डराणो सोरो कोनी
रंग बदलणै वाळै गिरगिटियां लोगां नै
मरम धरम रो मारग समझणो सोरो कोनी
कानूनी पचड़ै रा मारग कांट कंटीला है
दोस कोई साबित करवाणो सोरो कोनी
जद माड़ा दिन आवै तद थे म्है सै जाणां
जग जंगळ में लाज बचाणो सोरो कोनी
मंजिल-मारग नै हिवड़ै री हांस बणालै
उण पंथी रो पंथ भटकणो सोरो कोनी
मेह अर सूरज किरणां रो कर गंठजोड़ो
इंद्रधणख आभै छिटकाणो सोरो कोनी
तन री ताकत, हियै री हिम्मत, तेज तपण रो
‘शंकर’ आं बिन विष गटकाणों सोरो कोनी।