फूल मन रा खिल जावै

थारौ साथ मिल जावै।

थे अर म्हैं मिल्या सूं

दुसमी रा गढ़ हिल जावै।

नव उजियाळौ लावै सूरज

रात अंधारी ढळ जावै।

सामी भाळ अबै सावरां

दुखरा दिनड़ा ढळ जावै।

खुशियां जद मिलै तो राही

पीड़ परनाळौ खुल जावै।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : अब्दुल समद ‘राही’ ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-29
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