निज भोगी पर बीती कह तूं

पण बातां नीति री कह तूं

जांच परख साची या झूठी

बात नहीं उडती सी कह तूं

नीति सम्मत निरणै करजै

मत तूं हांजी हांजी कह तूं

चोखी लागै सब रै हित री

ईंकी अर ऊंकी भी कह तूं

हर बार रूखी-सूखी सी

कदै तो भीगी-भीगी कह तूं

रामदयाल जीवण भर झूठी

अब तो साची-साची कह तूं

स्रोत
  • पोथी : राजस्थली ,
  • सिरजक : रामदयाल मेहरा ,
  • संपादक : श्याम महर्षि ,
  • प्रकाशक : मरुभूमि शोध संस्थान (राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति, श्रीडूंगरगढ़)
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