घर री बात करी म्हे तो दर री बात करी म्हे तो

जठै कुछ प्रेम बस मिलग्यौ, बठै ही रात कटी म्हे तो

बड़ै ही प्यार सूं पीड़ा नै मुळकां देंवता आया

कदै बिसवास रै साथै कोई ना घात करी म्हे तो

जठै मुळकां रै होठां पर, दरद री बानगी देखी

बठै ही गीत रै धन री बरसात करी म्हे तो

हवा रो हाथ थाम्यौ तो फिर्‌या बेखौफ होकर

कदै परवाह कोई भी ना करी हालात री म्हेे तो

रह्यो मन प्रीत रो प्यासो, भटकतो पून रै साथै

कदै लूटी कोनी खुशियां कोई जज्बात री म्हे तो।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : मधुकर गौड़ ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-31
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