हो तिल बी जघां भी झाड़ अर झाड़ी खड़ी करदी

जरा सी बात नै दे तूल तूं इतरी बड़ी करदी

किसी साकी, किसा प्याला, किसी मनवार अर मैफल

भरी बोतल नै खाली, खा कै इक बर धड़धड़ी, करदी

कई दिन सूं मुर्गी देख म्हानै फड़ फड़ा री ही

मिली जद आज बिल्ली सूं तो ठंडी फड़फड़ी करदी

गिगन में देख बादळ फोड़ नांख्या सै घड़ा घर रा

बियां ही प्यार हाळै मामलै में हड़बड़ी करदी

निकळग्यो भैम थारौ और म्हारो अेक सागै ही

बखत पड़ियां मेहरबानी मुसीबत बापड़ी करदी

जठै तक गीत लिख र्‌यो हो बठै तक ठीक हो भागी

गजल जद सूं लिखण लाग्यो बड़ी ही गड़बड़ी करदी।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : भागीरथ सिंह भाग्य ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-14
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