मोहबत री बातां, मत कर।

नफरत री बातां, मत कर॥

धरती सूं अपणेस बढ़ा-।

जन्नत री बातां, मत कर॥

मैनत सूं तकदीर बदल-

किसमत री बातां, मत कर॥

जठै सांच री समझ नहीं-

उलफत री बातां, मत कर॥

आंगणिये बैठ्यो बैठ्यो-

तू छत री बातां, मत कर॥

सोफा पर पसर् ‌यां पसर् ‌यां-

परबत री बातां, मत कर॥

नीयत खोटी राख’र तू-

बरकत री बातां, मत कर॥

आदत तो मजबूरी है-

आदत री बातां, मत कर॥

म्हे हां कलमकार म्हां सूं-

दौलत री बातां, मत कर॥

जात-पांत रा जंगल में-

जनमत री बातां, मत कर॥

रोटी रा मोहताजां सूं-

असमत री बातां, मत कर॥

मन सूं हार गिया उण सूं

हिम्मत री बातां, मत कर॥

स्रोत
  • पोथी : जागती जोत ,
  • सिरजक : कुन्दन सिंह ‘सजल’ ,
  • संपादक : भगवतीलाल व्यास
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