फेर खिल्यो कंवळ कोई ओळ्यूं घणी आवै।

फेर गड्यो सूळ कोई ओळ्यूं घणी आवै।

परीत री ओढ चूंदड़ी सरमायगी चांदणी।

फेर बजी नखराळी पायल ओळ्यूं घणी आवै।

थारै सांसा री चंदणिया खसबू लेय’र।

ठंडी-ठंडी भाळ चाली, ओळ्यूं घणी आवै।

बादळां नै चूम रही छै हठीली बीजळी।

चोखो लागै ईं रो लाड, ओळ्यूं घणी आवै।

बिखरग्यो आकासां में थारी आंख रो काजळ

फेर चढी काळी घटा, ओळ्यूं घणी आवै।

स्रोत
  • पोथी : हिवड़ै रो उजास ,
  • सिरजक : मालचन्द्र ‘कमल’ ,
  • संपादक : श्रीलाल नथमल जोशी ,
  • प्रकाशक : शिक्षा विभाग राजस्थान के लिए उषा पब्लिशिंग हाउस, जोधपुर
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