कन्या हुयां धरम भी होसी

कुछ आबाद हरम भी होसी

छोर्‌यां को औसत बधबा सूं

चालो, चिन्ता कम भी होसी

ब्याव पुराणा पड़तां-पड़तां

आपस में गोधम भी होसी

नितकी धोंस धणीं की स्हैतां

नाकां मांये दम भी होसी

हाथां में आंकुस नहिं राख्यां

बहक्या हुया कदम भी होसी

जे सूवर को बाळ नहीं तो

आंख्यां मांय सरम भी होसी

होळी कुणसा हरी भजन छै

कादो, राख, उधम भी होसी

फोकट की पीबाळा सोचै

सोडो, विस्की रम भी होसी

सिवजी सूं छै बम को नातो

सिव सींच्यां बम-बम भी होसी

स्यात बिहारी उस्तादां की

अब कै भरी चिलम भी होसी।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : बिहारी शरण पारीक ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-28
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