तिणकलै री ई जो इतरी छिंयां है
तो साम्प्रत बिरछ री है वा किंयां है।
रूप री छिब भला किण भांत दीसै
खुलै नीं जड़ मनां री खिड़कियां है।
घणी गहरी रे पसरी अचपळी है
समंदर माछळयां कै आंखियां है।
पळाको-सो पड़े, दीसै नहीं है
वो उणरो रूप है कै बीजळ्यां है।
दरस नीं, परस नीं, तो ई छकावै
थूं है, थारै रच्योड़ी पूतळ्यां है।