सोच रो वातावरण गंदो हुयो है
आंख होतां आदमी अंधो हुयो है
पुलिस, नेता मौलवी, पंडित अर फादर
रूबरू सै कै कतल, दंगो हुयो है
देससेवा राजनेता के करैगा
राजनीति लूट रो धंधौ हुयो है
आकास पर अब कुण उछाळै पथरां नै
हौसला सैं दूर हर बंदो हुयो है
के मिल्यो कीं नै भला परिवार सूं
रिसतेदारी फरज रो फंदो हुयो है
चांदणी पर सैं की है मैली नजर
चांद खुद पर रोज सरमिंदो हुयो है।