हाल तांई कांई थैं चावता रह्या

आदमी रा आदमी डकारता रह्या

रातो-रात व्है ग्या डकार मालोमाल

राज नै दोष सारो दैवता रह्या

आये दिन पगां माथै ऊभा जिका है

अे टाबर उणां रा रोवता रह्या

शहीदां रै त्याग रा गुणगान सोरा

खुद नै तो त्याग खातर टाळता रह्या

हाल तांई सपनो तो सपनो है

गांधी री बात रा पग काटता रह्या

अठै खुद री तो ‘मीठा’ जाण ग्या खुद

अठै हर घड़ी लोह चणां चाबता रह्या

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : मीठालाल खत्री ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-17
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