फुलबाड़्यां की ज्यान छै कनीर की कळ्यां
मन सूं मैरबान छै कनीर की कळ्यां
जीं दन सूं छूट्यौ बागां आबौ-जाबौ
सूनी छै बेरान छै कनीर की कळ्यां
म्हां सूं न पूछी खुलगी’र पसब बणगी
अतनी बेईमान छै कनीर की कळ्यां
दमना क्यूं छौ थांकै घर कोई नहीं
अर म्हांकै मनमान छै कनीर की कळ्यां