गेशू-गेशू, जुल्फां-जुल्फां
काळी घटा सी छायोड़ी सी
आंख कहूं या समंदर कैद्यूं
बिल्लौरी सरमायोड़ी सी
नख सूं सिख तक हुसन टपकर्यो
अल्हड़ता गदरायोड़ी सी
नाज, नजाकत सरम हया सै
अपणै आप समायोड़ी सी
चाल में जालिम कै बा मस्ती
नींद में चलके आयोड़ी सी
देखी तद सूं लागी जिन्दगी
इब तक बिरथ बितायोड़ी सी
सांस ‘दीप’ की इब तक उखड़ी
और तबियत थर्रायोड़ी सी।