बड़ा लोग है बात बड़ी

किण नै किणरी अठै पड़ी

मीठा बोलो बदला में

सुणनी पड़सी बात कड़ी

जीभ उणां री रूकै नहीं

जद बातां री खुलै लड़ी

बाड़ खेत नै खावै

माथै ऊभी इसी घड़ी

न्याव नीति री बातां सुण

बै कर देवै खाट खड़ी

घरवाळी नै कुण पूछै

बाहर कीं सूं आंख लड़ी

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : मनोहरलाल गोयल ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-29
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