ध्यान में काणाँ काँई धार चल्या

थां भी तो जीवड़ा नै मार चल्या।

म्हाँ तो रहैग्या संभाळता पगड़ी

झोळी-डण्डा नै थाँ उठा’र चल्या।

अस्यो आबो बी काँई मतलब कौ

थाँ अबार आया अर अबार चल्या।

म्हाँ तो थाँ का बुलाया आया छा

थाँ ही म्हाँ नै अठीं बुला’र चल्या।

तर के आया छा थाँ की नैया सूं

थाँ नैया नै का डूबा’र चल्या।

कांई कहबो ‘यकीन’ जी थाँ कौ

थाँ तो म्हाँ की गजल सुणा’र चल्या।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : पुरुषोत्तम 'यकीन' ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशक पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 26
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