बण-ठण संवर नै देख

म्हारै हिवड़ै उतर नै देख

चांद बणजा म्हारै मन रौ

चांदणी बण बिखर नै देख

सुंगध बणजा घर आंगण री

फूल बण’र निखर नै देख।

नाम सरावै जग राही

काम इसड़ौ कर नै देख।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : अब्दुल समद ‘राही’ ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-29
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