कर्म पर ग़ज़ल

ग़ज़ल4

बाबा इतरो बोल मती

लक्ष्मणदान कविया

जो दिया करै सदा खुला हाथ सूं

आर. सी. शर्मा ‘गोपाल’

चोरी रो धन धूड़ भायला

जेठानंद पंवार

बण-ठण संवर नै देख

अब्दुल समद ‘राही’