आज गीत मांडो या, गजल सिणगार करै सा।

आज प्रीत छेड़ो ये अधर अरदास करैं सा॥

रोज-रोज सोयो यो मन, मन नैं मार अेकलो।

आज रीत तोड़ूं जे सजन फरमान करै सा॥

देख गांव वांको ये पग सरकबो बच्यारै।

कांई पांव तोड़ूं ये जबर अधिकार करैं सा॥

गेरुं की डल्यां सूं ये कलश रत रंग होग्या।

राग फाग मांगै ये अंग पलटमार करै सा॥

रात भी छ: देखो जी, मन मरजी में सजना।

आज तो पधारो जोबण रतजगाण करै सा॥

फूल-पात बागां का मंद मंद मुस्कान सजोया।

रास आज राधा गोविन्द संग चतराम करै सा॥

आज गीत मांडो या गज़ल सिणगार करै सा।

आज प्रीत छेड़ो ये अधर अरदास करै सा॥

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : गोविन्द हाँकला ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन, पिलानी ,
  • संस्करण : अंक-19
जुड़्योड़ा विसै