थांनै झुक झुक करूं सलाम पावणां,
अमोळा दनां में,
म्हारा घर आडी मत देख।
थारो मन किसन कन्हैया की बंसी,
म्हारो मन जमना का तट की रेत।
चंदा को चकोर सूं कुमुदणी को चांदणी ज्यूं,
थारो म्हारो जनम-जनम को हेत।
थारा पगल्या च्यारूं धाम पावणां,
गरीबी बणी पण,
म्हारी देळ की लछमण रेख।
थानै झुक झुक...
हालचाल कांई बतळाऊं भोळा बीरा थांनै,
खेतां की मेरां मं जाग्या भूख का दलाल।
सांसां में समाई सारी दृष्टि की सकीमी,
अर आंख्यां में तसाया बैठ्या तस का सवाल।
थारी लीला ललित ललाम पावणा
सांच सांच कह द्यूं
ईं में तल भर मीन न मेख।
थां नै झुक झुक...