म्हांरे सभा भरादो, वातां सुणावाँ नवे भाँत री॥
दौरौ करता गांव-गांव रो आज आपरै आया।
देश सुधारण भाँत-भाँत री नवी बात म्हे लाया जी।
म्हांरे सभा भरादो, वातां सुणावाँ नवे भाँत री॥
थांरा सरीखा ज्ञान सुणावा अठै मोकळा आवै।
म्हांने नहीं फुरसत मरवा री भाखर पाळा जावेजी।
थे पाछा जावो फुरसत नहीं म्हांने घंटा-पाव री।
म्हांरे सभा भरादो, वातां सुणावाँ नवे भाँत री॥
सूता हो थे मोह लोभ में अबै जागणो पड़सी।
नहीं सूणो जो बात राह री आाखर थांरै अड़सी जी।
म्हांरे सभा भरादो, वातां सुणावाँ नवै भाँत री॥
निकमा व्है सो भरै सभावां फोकट टेम गमावै।
धंधो-छोड़ सुणां जो थांरी पेट भरण कुण आवै जी।
थे पाछा जावो फुरसत नहीं म्हांने घंटा पाव री।
दुनियां में तो पेट आपरो कुत्तो भी भर लेवै।
समझदार जाति री सेवा करवा में चित्त देवै जी।
म्हांरे सभा भरादो, वातां सुणावाँ नवै भाँत री॥
छोड़ो पिण्ड बावड़ी पाछा करो न माथा फोड़।
मांन तांन से भांन भूल क्यूँ व्यर्थ मचावो झोड़ जी।
थे पाछा जावो फुरसत नहीं महांने घंटा पाव री।
मांन और अपमांन मेलवा दोस गूँजिया म्हांरे।
म्हारो काम करांला अंतर नहीं आपरे सारे जी।
म्हांरे सभा भरादो, वातां सुणावाँ नवै भाँत री॥
लेणो व्है लेलो पेटिया आप अठा सूँ जावो।
लोगां ने बहकावा आया उल्टो रोब जमावो जी।
थे पाछा जावो फुरसत नहीं महांने घंटा पाव री।
बूढ़ा जी थे निर्बल हो गया पिण टाबर तैयार।
सभा भरांला आज मोटकी चवड़े बीच बजार जी।
म्हांरे सभा भरादो, वातां सुणावाँ नवै भाँत री॥
जाओ-जाओ देखूँ थाँरी कितरी मोटी पौं'च।
म्हारा टाबर म्हारे कब्जे नहीं किणी री आँच जी।
थे पाछा जावो फुरसत नहीं महांने घंटा पाव री।
अै देखो सब युवक गांव रा झंडो ले'नै आया।
जिन्दाबाद रो नारो लाया फौज देख घबराया।
म्हांरे सभा भरादो, वातां सुणावाँ नवै भाँत री॥