सात रंग रा घोड़ा इण रा

सात सुरां री तान भर

नींदड़ली उचटा गयो

तारां छाई रात में सूरज रो रथ गयो

तारां छाई रात में...

रंग-रंगीलो छैल-छबीलो

चमकीलो-सो चटकीलो-सो

हंसतो-गातो टेर लगातो

सामी म्हारै बैठ के तंबूरो बजा गयो

तारां छाई रात में सूरज रो रथ गयो...

नाम बतातो गांव बतातो

गजल सुणातो गीत सुणातो

मन री सगळी बात बतातो

गीतां रो बावळियो बण के मधरा गीत सुणा गयो...

नैणां री बोली बतळातो

हियै प्रीत री हूक जगातो

भंवरै ज्यूं घिर-घिर नै आतो

कुतर-कुतर काळजियो बैरी मनड़ै नै

बिलमा गयो...

स्रोत
  • पोथी : कथेसर ,
  • सिरजक : अनिता सैनी ,
  • संपादक : रामस्वरूप किसान ,
  • प्रकाशक : कथेसर प्रकाशन ,
  • संस्करण : अप्रैल-जून 2026
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