मत जाओ पिया परदेस बात मानो।

नीं रैवै लोभ'र थोभ साच जाणो॥

धन करो मोकळो भेळो, काम काँई आवै।

कोई ड्योढ़ पाव आटा सूं इधक नहीं खावै।

मत जाओ पिया परदेस बात मानो।

नीं रैवै लोभ'र थोभ साच जाणो॥

बिन कियाँ पाप धन धाप हाथ नहीं आवे।

पाप कमाई जड़ामूल सूं जावै।

मत जाओ पिया परदेस बात मानो।

नीं रैवै लोभ'र थोभ साच जाणो॥

जद आठ हाथ खादी सूं काम चल जावै।

कुण खीन-खाप रै कारण पाप कमावै।

मत जाओ पिया परदेस बात मानो।

नीं रैवै लोभ'र थोभ साच जाणो॥

जो मजो झूँपड़ी माय महनती पावै।

सपना में सुख महल माँय नहीं आवै।

मत जाओ पिया परदेस बात मानो।

नीं रैवै लोभ'र थोभ साच जाणो॥

घर रहो सादगी माँय काम में लागो।

बिन जरूत री चीजां नै त्यागो।

मत जाओ पिया परदेस बात मानो।

नीं रैवै लोभ'र थोभ साच जाणो॥

पिऊ पिया रहे नित साथ चाल-चल सादी।

‘श्री' आडम्बर रै माँय घणी बरबादी।

मत जाओ पिया परदेस बात मानो।

नीं रैवै लोभ'र थोभ साच जाणो॥

स्रोत
  • पोथी : शुभगीत ,
  • सिरजक : श्रीनाथ मोदी
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