पाछो माँडो अरटियो, क्यू खूँटी माथै धरियो रे।

गाँधीजी तो देश रो उपकार करियो रे।

माँडो अरटियो, सीखामण साची रे॥

ठाला बैठा मानवियां नै, ऊँधा काम सूझे रे।

काम करतां ज्याँनै लोग बूझे रे।

माँडो अरटियो, सीखामण साची रे॥

काठा गाभा पैरै ज्यां रे, घर में लाभ होवे रे।

झीणा कपड़ा पेरतां तो पूंजी खोवै रे।

माँडो अरटियो, सीखामण साची रे॥

गायां री चरबी री पांण, जिणरै मांय लागै रे।

पाप रो तो लेखो जिणरो होसी आगै रे।

माँडो अरटियो, सीखामण साची रे॥

परदेसी तो मौज उडावै, देशी निकमा रेवै रे।

कई करोड़ रो घाटो वरसा-वरसी सहवै रे।

माँडो अरटियो, सीखामण साची रे॥

'धीरज' धारो देश सुधारो, अँगरेजी जनै धारो रे।

नेताजी है देश री आंखां रो तारो रे।

माँडो अरटियो, सीखामण साची रे॥

स्रोत
  • पोथी : शुभगीत ,
  • सिरजक : श्रीनाथ मोदी
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