मनड़ै री कोटड़ी में थारो ही उजाळो हो

छायो मन-प्राण मांय अेक उणियारो हो।

हियै पै मंड्योड़ी थारी मूरत सांवळी

बिछुड़न लागी जिण वेळा म्हैं तो बावळी।

बढै जद बीपी थारी डीपी जूम करूं हूं

काळजै लगायके म्हैं थानै फील करूं हूं।

मुळकती डीपी जद देखी म्हैं उतावळी

हियै पै मंड्योड़ी थारी मूरत सांवळी।

बिछुड़न लागी जिण वेळा म्हैं तो बावळी।

थारा ही खयालां मांय नित खोई रैवूं हूं

थारै ही भरोसै नाव जिंदगी री खेवूं हूं।

प्रीत नै पिछाणो संईयां मरजी है रावळी

हियै पै मंड्योड़ी थांरी मूरत सांवळी।

बिछुड़न लागी जिण वेळा म्हैं तो बावळी।

स्रोत
  • पोथी : कथेसर ,
  • सिरजक : अनिता सैनी ,
  • संपादक : रामस्वरूप किसान ,
  • प्रकाशक : कथेसर प्रकाशन ,
  • संस्करण : अप्रैल-जून 2026
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