मद रा भर्या तळाव, नैण नसीला आपरा।
डूब-डूब तिर आय, मन म्हारौ है मांछळी॥
सरबत रा दरियाव, बैण रसीला आपरा।
लहर-लहर रम जाय, मन म्हारौ है मांछळी॥
रेसम जाळ तणाय, सैन सुहाणी आपरी।
उळझ-उळझ रह जाय, मन म्हारौ है मांछळी॥
समदर सरिस अथाह, रूप लुभाणौ आपरौ।
बूंद-बूंद परवाह, मन म्हारौ है मांछळी॥
मन्थर नदी प्रवाह, चाल गमेजण आपरी।
जळ-सळ चूमण चाह, मन म्हारौ है मांछली॥