मद रा भर्‌या तळाव, नैण नसीला आपरा।

डूब-डूब तिर आय, मन म्हारौ है मांछळी॥

सरबत रा दरियाव, बैण रसीला आपरा।

लहर-लहर रम जाय, मन म्हारौ है मांछळी॥

रेसम जाळ तणाय, सैन सुहाणी आपरी।

उळझ-उळझ रह जाय, मन म्हारौ है मांछळी॥

समदर सरिस अथाह, रूप लुभाणौ आपरौ।

बूंद-बूंद परवाह, मन म्हारौ है मांछळी॥

मन्थर नदी प्रवाह, चाल गमेजण आपरी।

जळ-सळ चूमण चाह, मन म्हारौ है मांछली॥

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : कल्याणसिंह राजावत ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-14
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