कर काळा बाजार देश में, लोभी लूट मचाई है।

गुप्त भरै भण्डार मांयनै, बाहिर खूट बताई है॥

लुच्चा जाणै है सारी, झूठ-मूठ रो बण व्यापारी।

अै'लकार यूँ साठ-गांठ कर अपणी हाट चलाई है।

कर काळा बाजार देश में, लोभी लूट मचाई है।

गुप्त भरै भण्डार मांयनै, बाहिर खूट बताई है॥

मूँडै मांगी रिश्वत देवै, मोटा कोटा क्यूँ नहीं लेवै।

असली जो दुकानदार हा वांनै धता बताई है।

कर काळा बाजार देश में, लोभी लूट मचाई है।

गुप्त भरै भण्डार मांयनै, बाहिर खूट बताई है॥

परमिट पर परमिट पा जावै, वेगन भर-भर माल मंगावै।

रात-रात में माल छिपादे, दिन रा राखै सफाई है।

कर काळा बाजार देश में, लोभी लूट मचाई है।

गुप्त भरै भण्डार मांयनै, बाहिर खूट बताई है॥

टेलीफोन तार है जारी, अन-सैन देवे सिनकारी।

सीधा ग्राहक समझ पावै वांनै ही कठिनाई है।

कर काळा बाजार देश में, लोभी लूट मचाई है।

गुप्त भरै भण्डार मांयनै, बाहिर खूट बताई है॥

ऊपरला पैली दे जावै, माल उठावण पीछै आवै।

कैश मेमो दे काट-ठाठ सूँ अपणी साख दिखाई है।

कर काळा बाजार देश में, लोभी लूट मचाई है।

गुप्त भरै भण्डार मांयनै, बाहिर खूट बताई है॥

चिकरी से ये ढंग बतावे, मोटी-मोटी लेख लगावै।

धक्का पैल में थोड़ो बांटे कैसी या नकटाई है।

कर काळा बाजार देश में, लोभी लूट मचाई है।

गुप्त भरै भण्डार मांयनै, बाहिर खूट बताई है॥

मीठा बोले 'धीरज' धारो, माल नहीं है घरै पधारो।

गवरमेण्ट रै इन्तजाम री पोते करै बुराई है।

कर काळा बाजार देश में, लोभी लूट मचाई है।

गुप्त भरै भण्डार मांयनै, बाहिर खूट बताई है॥

स्रोत
  • पोथी : शुभगीत ,
  • सिरजक : श्रीनाथ मोदी
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