मनड़ै री कोटड़ी में थारो ही उजाळो हो।

छायो मन-प्राण मांय अेक उणियारो हो।

हियै पै मंड्योड़ी थारी मूरत सांवळी।

बिछुड़न लागी जिण वेळा मैं तो बावळी॥

बढ़ै जद बीपी थारी डीपी जूम करूं हूं।

काळजै लगायकै मैं थानै फील करूं हूं।

मुळकती डीपी जद देखी मैं उतावळी।

हियै पै मंड्योड़ी थारी मूरत सांवळी।

बिछुड़न लागी जिण वेळा मैं तो बावळी॥

थारा ही ख्यालां मांय नित खोई रैवूं हूं।

थारै ही भरोसै नाव ज़िन्दगी री खैवूं हूं।

प्रीत नै पिछाणो संईयां मरजी है रावळी।

हियै पै मंड्योड़ी थारी मूरत सांवळी।

बिछुड़न लागी जिण वेळा मैं तो बावळी॥

स्रोत
  • पोथी : कवि रै हाथां चुणियोड़ी
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