तूटै म्हारा बाजूड़ा री लूंब, लट उळझी जाय

कोई पिचरंगै मोळियै रा पल्ला लहराय

बैरी चंवरी री चूंदड़ी में सळ पड़ जाय!

धीमै धीमै रै बायरिया, झोलौ सयौ जाय!

आवै बिरखा री रुत, झूमै सूरियौ पवन

लावै गोरी रौ संदेसौ घर आवौ रे सजन

हींडा बादळी हिंडाय

बिजळी चंवर दुळाय

लागै बिरखा री जड़

जांणै मोतीड़ां री लड़

बैरी नथड़ी रौ मोती उतर नहिं जाय!

झींणौ झींणौ रे बायरिया, झोलौ सयौ जाय!

ठंडी बूठौड़ा री लैर, मीठा बटाऊ रा गीत

भली भादरवा री रात, मिळौ मनड़ै रा मीत

लागै प्यारी पुरवाई

तो लूमझूम आई

लाई सपना संवार

बाजै हिवड़ै रा तार

देखौ लागै नहिं ठेस, वीणा तूट नहिं जाय!

होळै होळै रे बायरिया, झोलौ सह्यौ जाय!

झीणी दिखणी री पून, उडै दिखणी रौ चीर

आवौ ढळतै चौमासै, नैनी नणदी रा वीर

आयौ आसोजां रौ मास

मन मिळणै री आस

गोरी डागळियै चढ़ जोय

तौ ओळंड़ी कर रोय

बैरी आंसूड़ा रौ हार बिखर नहीं जाय!

धीमो मुदरौ रै बायरिया, झोलौ सह्यौ जाय!

स्रोत
  • पोथी : चेत मांनखा ,
  • सिरजक : रेवंतदान चारण कल्पित ,
  • संपादक : कोमल कोठारी ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी ग्रन्थागार, जोधपुर
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