छोड़तां मन-मेळू रो साथ
न उसा हूं सम्हळै सिणगार
मदभरी ले लाली मुख लाज
बिखेरै कण-कण मांय बहार
ऊजळी मीठी हंसी बिखेर
डूंगरा रै सिखरां पर झांख
अंधारै रा ढूंढै रैठाण
सोवणी लेय रंगीली पांख
मुळक मिलतो धर-आभो देख
पून मिस मीठी कर मनवार
पुसब सोरभ रै समचै पुळक
बुलावै आलीजै नैं द्वार
छोड़ सपनां री मीठी नींद
तोड़ तन आळस रो कर त्याग
झिझकती पलकां मन बिन झांख
उठै आंखड़ल्यां भर अनुराग
लियां सपना रो साथी साथ
सुहागण भोळी आ सुकुमार
साथ संग पणघट गळी गुवाड़
जोवती जावै मुड़ घर-बार
रूप रै सरवरियै री ल्हैर
भर्या हिवड़ै आभा छिब-धाम
बता क्यूं इतरा रंग बिखेर
बणाई नभ-धरणी अभिराम
कसूमल-बरणो गैरो हेत
हरै हिवड़ै रो हरख दिखाय
गुलाबी जोबन रो ओ अरथ
सोसन्यां सपनां में समझाय
सुणावै पणघट मीठा बोल
प्रीत रै पाणी मिस पणिहार
करै हळका मन-बंधण तोड़
हेत रा झरणां ज्यूं हरखा’र
रात रा सुना गळी-गुवाड़
भर्या भरियै मन घणै उछाह
भरै सूणां रा सपना साज
घणां री रीती आंख्यां मांह
कूकड़ै रा कोडीला बोल
भरै कमतरियां मन घण कोड
कहै, नवजीवण रो परभात
हुयो, नर जाग सोवणो छोड़
गीत परभात्यां री मिल गूंज
घट्यां री घमड़-घमड़ घमरोळ
करै महणत हळकी भर उमंग
हियै उमड़ाय’र आणंद छोळ
ऊजळै मनड़ै आळी जोय
गिगन में बासंती परभात
उठ्या मेटण दाळद अंधार
अधूरी आसावां ले साथ
आस उसा री जोड़ अनूप
सूरज कमतरियां रो ज्यूं साथ
रचण नवजीवन रो रस राग
भर्यां चालै जुग-बंधण बाथ।